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बांका : शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की मनाई गई जयंती अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी संघ के तत्वावधान में रविवार को शहर के विजयनगर मोहल्ले में भारत की प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर और दीप जलाकर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च माध्यमिक शिक्षिका प्रिया कुमारी ने की। संघ के कार्यकारिणी सदस्य बाबूलाल हरिजन, वासुदेव रजक और संयुक्त सचिव विनोदानंद हरिजन ने भी सावित्रीबाई फुले के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के सचिव पप्पू कुमार निराला ने सावित्रीबाई फुले के जीवन और संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले आधुनिक भारत में महिला शिक्षा की मजबूत आधारशिला थीं। समाज की तमाम बाधाओं और विरोध के बावजूद उन्होंने महिलाओं और वंचित वर्गों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। सचिव ने कहा कि सावित्रीबाई फुले के प्रयासों का ही परिणाम है कि आज महिलाएं केवल घर-गृहस्थी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान और समाज के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। उन्होंने युवाओं से सावित्रीबाई फुले के विचारों को आत्मसात करने की अपील की। मौके पर संघ की संगठनात्मक मजबूती को लेकर भी निर्णय लिए गए। सर्वसम्मति से एसपी कार्यालय में कार्यरत इंस्पेक्टर अमेरिका राम को संघ का जिला अध्यक्ष चुना गया। वहीं, प्रखंडवार प्रभारी के रूप में बांका अनुमंडल कार्यालय के वरीय लिपिक बाबूलाल हरिजन, रजौन के प्रधान शिक्षक विनोदानंद हरिजन, अमरपुर की एपीएसडब्ल्यूएमओ अभिलाषा अपूर्वा, कटोरिया के डीडीओ विनोद दास तथा फुल्लीडुमर के प्रधानाध्यापक सुरेंद्र हांसदा को जिम्मेदारी सौंपी गई। कार्यक्रम में गीता देवी, रीना देवी, भारती देवी, मनोरमा देवी, सीमा देवी, नेहा कुमारी, योगेन्द्र दास, सुरेंद्र दास, कृष्ण कुमार कौशल, अविनाश कुमार, चमकलाल दास, डोली कुमारी, करीना कुमारी सहित बड़ी संख्या में संघ के सदस्य उपस्थित थे।
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बांका: देश की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर गूंजे महिला सशक्तिकरण के स्वर
बांका, बिहार: सावित्रीबाई फुले शिक्षा की अलख जगाने वाली और आधुनिक भारत की पहली महिला शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले की जयंती बांका में बड़े ही उत्साह और गरिमा के साथ मनाई गई। रविवार को शहर के विजयनगर मोहल्ले में आयोजित इस भव्य समारोह का नेतृत्व अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी संघ ने किया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के बुद्धिजीवियों और कर्मचारियों ने हिस्सा लेकर सावित्रीबाई फुले के योगदान को याद किया।
श्रद्धांजलि और दीप प्रज्वलन
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ सावित्रीबाई फुले के सावित्रीबाई फुले तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर और दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उन्हें नमन करते हुए समाज के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। समारोह की अध्यक्षता उच्च माध्यमिक शिक्षिका प्रिया कुमारी ने की। इस दौरान संघ के वरिष्ठ सदस्यों—बाबूलाल हरिजन, वासुदेव रजक और संयुक्त सचिव विनोदानंद हरिजन—ने भी अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सावित्रीबाई फुले: संघर्ष और शिक्षा की प्रतीक
समारोह को संबोधित करते हुए संघ के सचिव पप्पू कुमार निराला ने सावित्रीबाई फुले के जीवन संघर्षों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:
- शिक्षा की आधारशिला: सावित्रीबाई फुले केवल एक शिक्षिका नहीं, बल्कि आधुनिक भारत में महिला शिक्षा की नींव रखने वाली महान समाज सुधारक थीं।
- सामाजिक बाधाओं पर विजय: जिस दौर में महिलाओं और दलितों के लिए शिक्षा के द्वार बंद थे, उस कठिन समय में उन्होंने समाज के कड़े विरोध और पत्थर-मिट्टी की चोट सहकर भी बेटियों को पढ़ाना नहीं छोड़ा।
- समानता का संदेश: उन्होंने वंचितों और शोषित वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
सचिव ने आगे कहा कि आज महिलाएं जिस मुकाम पर हैं—चाहे वह प्रशासन हो, विज्ञान हो या शिक्षा—उसकी प्रेरणा कहीं न कहीं माता सावित्रीबाई फुले के संघर्षों से ही मिलती है।
संगठन का विस्तार और नई जिम्मेदारियां
जयंती समारोह के साथ-साथ अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी संघ की मजबूती को लेकर भी महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णय लिए गए। सभा में सर्वसम्मति से नए पदाधिकारियों का चयन किया गया, जो जिले में संघ की गतिविधियों को गति देंगे:
| पद / जिम्मेदारी | चयनित पदाधिकारी का नाम | वर्तमान पदस्थापन |
| जिला अध्यक्ष | अमेरिका राम | इंस्पेक्टर, एसपी कार्यालय |
| बांका अनुमंडल प्रभारी | बाबूलाल हरिजन | वरीय लिपिक, अनुमंडल कार्यालय |
| रजौन प्रखंड प्रभारी | विनोदानंद हरिजन | प्रधान शिक्षक |
| अमरपुर प्रभारी | अभिलाषा अपूर्वा | APSWMO |
| कटोरिया प्रभारी | विनोद दास | DDO |
| फुल्लीडुमर प्रभारी | सुरेंद्र हांसदा | प्रधानाध्यापक |
उपस्थित गणमान्य
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिला कर्मचारियों ने भाग लिया। मुख्य रूप से गीता देवी, रीना देवी, भारती देवी, मनोरमा देवी, सीमा देवी, नेहा कुमारी, योगेन्द्र दास, सुरेंद्र दास, कृष्ण कुमार कौशल, अविनाश कुमार, चमकलाल दास, डोली कुमारी और करीना कुमारी सहित दर्जनों सदस्य उपस्थित रहे।
निष्कर्ष:
यह कार्यक्रम न केवल एक जयंती समारोह था, बल्कि समाज के वंचित वर्गों के लिए शिक्षा और एकता का संकल्प लेने का एक मंच भी बना। उपस्थित सभी सदस्यों ने सावित्रीबाई फुले के विचारों को आत्मसात करने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचाने का प्रण लिया।
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शिक्षा की ज्योति और सामाजिक न्याय की मशाल: सावित्रीबाई फुले
विशेष रिपोर्ट: बांका (बिहार)
भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, महान समाज सुधारिका और कवयित्री क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर बिहार के बांका जिले में वैचारिक चेतना का संचार देखा गया। अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी संघ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल एक महान व्यक्तित्व को याद किया, बल्कि समाज के वंचित और शोषित वर्गों के लिए शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया।
विजयनगर में जुटा जनसैलाब: श्रद्धा और संकल्प का संगम
बांका शहर के विजयनगर मोहल्ले में आयोजित इस गरिमामय समारोह का वातावरण पूरी तरह सावित्रीबाई फुले के आदर्शों के रंग में रंगा था। कार्यक्रम की शुरुआत एक भावुक क्षण के साथ हुई जब समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए बुद्धिजीवियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें “ज्ञान की जननी” के रूप में नमन किया।
समारोह की अध्यक्षता कर रही उच्च माध्यमिक शिक्षिका प्रिया कुमारी ने अपने संबोधन में कहा, “आज अगर मैं एक शिक्षिका के रूप में आपके सामने खड़ी हूँ, तो इसका पूरा श्रेय सावित्रीबाई फुले के संघर्षों को जाता है। उन्होंने तब स्कूल जाने का साहस किया जब समाज में महिलाओं का घर से निकलना भी वर्जित था।”
इतिहास के पन्नों से: संघर्ष की गाथा
संघ के सचिव पप्पू कुमार निराला ने सावित्रीबाई फुले के जीवन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने उन ऐतिहासिक संघर्षों को जीवंत किया जो आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं:
- कठिनाइयों का सामना: जब सावित्रीबाई फुले पढ़ाने के लिए स्कूल जाती थीं, तो रूढ़िवादी लोग उन पर पत्थर और कीचड़ फेंकते थे। वे अपने साथ एक अतिरिक्त साड़ी लेकर चलती थीं ताकि स्कूल पहुंचकर उसे बदल सकें। यह उनकी अटूट इच्छाशक्ति का प्रमाण था।
- ज्योतिबा फुले का साथ: सावित्रीबाई और उनके पति महात्मा ज्योतिबा फुले ने मिलकर 1848 में पुणे में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला। यह आधुनिक भारत के इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम था।
- जातिवाद के विरुद्ध जंग: उन्होंने न केवल महिलाओं के लिए, बल्कि दलितों और अछूतों के लिए भी पानी की टंकियां खुलवाईं और उन्हें शिक्षित करने का बीड़ा उठाया।
सचिव ने जोर देकर कहा कि सावित्रीबाई फुले के प्रयासों का ही परिणाम है कि आज की महिला शिक्षा, प्रशासन, अंतरिक्ष विज्ञान और राजनीति जैसे हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।
सांगठनिक सुदृढ़ीकरण: नई नियुक्तियां और भविष्य की रणनीति
इस जयंती समारोह का दूसरा महत्वपूर्ण चरण अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी संघ की संगठनात्मक मजबूती पर केंद्रित रहा। संघ का मानना है कि महापुरुषों के विचारों को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे संगठनात्मक ढांचे के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना चाहिए।
इसी उद्देश्य से, सर्वसम्मति से महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां की गईं:
- नेतृत्व: एसपी कार्यालय के इंस्पेक्टर अमेरिका राम को जिला अध्यक्ष चुना गया। उनका अनुभव संघ को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक होगा।
- क्षेत्रीय विस्तार: प्रखंडवार स्तर पर शिक्षा और प्रशासन से जुड़े अनुभवी व्यक्तियों को जिम्मेदारी दी गई है, ताकि गांव-गांव तक कर्मचारी हितों और सामाजिक चेतना का प्रसार हो सके।
प्रखंडवार प्रभारियों की सूची:
- बांका अनुमंडल: बाबूलाल हरिजन
- रजौन प्रखंड: विनोदानंद हरिजन
- अमरपुर प्रखंड: अभिलाषा अपूर्वा
- कटोरिया प्रखंड: विनोद दास
- फुल्लीडुमर प्रखंड: सुरेंद्र हांसदा
महिला सशक्तिकरण की वर्तमान तस्वीर
कार्यक्रम में उपस्थित महिला सदस्यों—गीता देवी, रीना देवी, भारती देवी और अन्य—ने इस बात पर बल दिया कि सावित्रीबाई फुले के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने 19वीं सदी में थे। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा और उनके अधिकारों को लेकर कई चुनौतियां विद्यमान हैं। संघ ने संकल्प लिया कि वे जिले के पिछड़े इलाकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता अभियान चलाएंगे।
निष्कर्ष: एक विचार जो कभी नहीं मरता
बांका में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि सावित्रीबाई फुले केवल एक ऐतिहासिक पात्र नहीं हैं, बल्कि वे एक जीवंत विचार हैं। उनके द्वारा जलायी गई शिक्षा की मशाल आज बांका के विजयनगर से लेकर पूरे देश में उजाला फैला रही है।
समारोह के अंत में बाबूलाल हरिजन और वासुदेव रजक ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया और युवाओं से आह्वान किया कि वे सोशल मीडिया और आधुनिक युग की चकाचौंध के बीच अपने महापुरुषों के बलिदानों को न भूलें।
मुख्य उपस्थिति:
समारोह में मनोरमा देवी, सीमा देवी, नेहा कुमारी, योगेन्द्र दास, सुरेंद्र दास, कृष्ण कुमार कौशल, अविनाश कुमार, चमकलाल दास, डोली कुमारी, करीना कुमारी समेत सैकड़ों कर्मचारी और समाज के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।
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