
बांका, बिहार: समाज में बेटियों की स्थिति को मजबूत करने और कुप्रथाओं को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से बिहार के बांका जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला के कुशल निर्देशन में, चांदन प्रखंड के अंतर्गत आने वाले नावाडीह स्थित ‘संगम जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड’ में एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ और ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ रहा। महिला एवं बाल विकास निगम द्वारा आयोजित इस विशेष ‘सखी वार्ता’ ने न केवल महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया, बल्कि समाज को एक नई दिशा देने का संकल्प भी दिलाया।
1. कार्यक्रम की मुख्य रूपरेखा और नेतृत्व
इस जागरूकता कार्यक्रम का सफल संचालन जिला महिला सशक्तिकरण केंद्र की विशेषज्ञ टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व जेंडर स्पेशलिस्ट (लैंगिक विशेषज्ञ) और वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से किया। इनका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर महिलाओं को सरकारी तंत्र और उनके लिए उपलब्ध सुरक्षा चक्रों से अवगत कराना था।
लैंगिक विशेषज्ञ मो. महबूब आलम ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए महिलाओं को संबोधित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब तक महिलाएं आर्थिक और मानसिक रूप से स्वतंत्र नहीं होंगी, तब तक समाज का पूर्ण विकास संभव नहीं है।
2. ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना: केवल नारा नहीं, एक आंदोलन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना का असर अब बांका के दूरदराज के गांवों में भी दिखने लगा है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि इस योजना के तीन मुख्य स्तंभ हैं:
- कन्या भ्रूण हत्या को रोकना: समाज में लिंग चयन को समाप्त करना।
- बालिका अस्तित्व और सुरक्षा: बेटियों के जन्म और उनके शुरुआती वर्षों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- शिक्षा का अधिकार: बेटियों को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना।
बांका जिले में इस योजना के तहत विशेष प्रयास किए जा रहे हैं ताकि लिंगानुपात (Sex Ratio) में सुधार लाया जा सके।
3. बाल विवाह मुक्त भारत: एक सामाजिक संकल्प
बाल विवाह जैसी कुप्रथा न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह एक लड़की के बचपन और उसके भविष्य की हत्या है। चांदन के इस कार्यक्रम में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पर विशेष जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि बाल विवाह के क्या नुकसान हैं:
- स्वास्थ्य पर प्रभाव: कम उम्र में शादी और गर्भधारण से मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में वृद्धि होती है।
- शिक्षा का अंत: शादी के बाद अक्सर लड़कियों की पढ़ाई छूट जाती है।
- मानसिक दबाव: कम उम्र में घर-गृहस्थी की जिम्मेदारी लड़कियों के मानसिक विकास को बाधित करती है।
4. महिलाओं के लिए उपलब्ध सरकारी सुरक्षा तंत्र (Safety Networks)
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और जीविका दीदियों को महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों और केंद्रों की जानकारी दी गई, जो संकट के समय उनकी मदद कर सकते हैं:
क. वन स्टॉप सेंटर (One Stop Center)
हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए यह एक सुरक्षित आश्रय स्थल है। यहाँ एक ही छत के नीचे कानूनी सहायता, चिकित्सा सहायता, पुलिस सहायता और मनोवैज्ञानिक परामर्श प्रदान किया जाता है।
ख. 181 महिला हेल्पलाइन
यह टोल-फ्री नंबर 24 घंटे उपलब्ध है। कोई भी महिला या लड़की जो संकट में हो, इस नंबर पर फोन करके तुरंत सरकारी मदद प्राप्त कर सकती है।
ग. जिला महिला सशक्तिकरण केंद्र
बांका जिले में कार्यरत यह केंद्र महिलाओं के कौशल विकास, वित्तीय सहायता और उनकी शिकायतों के निवारण का प्रमुख केंद्र है।
5. वित्तीय साक्षरता: सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी
वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ शेखर कुमार दास ने महिलाओं को समझाया कि ‘जेब में पैसा और दिमाग में हिसाब’ होना क्यों जरूरी है। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए बैंक खातों का सही संचालन और डिजिटल साक्षरता कितनी आवश्यक है।
वित्तीय साक्षरता के अंतर्गत मुख्य बिंदु:
- दहेज प्रथा का आर्थिक बोझ कम करने के लिए बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना।
- सरकारी बचत योजनाओं (जैसे सुकन्या समृद्धि योजना) का लाभ उठाना।
- सूक्ष्म ऋण (Micro-finance) के माध्यम से छोटे व्यवसाय शुरू करना।
6. जीविका दीदियों की भूमिका: परिवर्तन की वाहक
बांका जिले में जीविका (Jeevika) समूह की महिलाएं समाज सुधार की रीढ़ साबित हो रही हैं। इस कार्यक्रम में संगम जीविका समूह की अध्यक्ष सावित्री देवी और बुक कीपर मंजू पांडेय सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया।
लैंगिक विशेषज्ञ श्रीकांत कुमार ने उपस्थित सभी जीविका दीदियों को संकल्प दिलाया कि:
- वे अपने गांव में किसी भी बच्ची का बाल विवाह नहीं होने देंगी।
- हर बेटी का स्कूल में नामांकन सुनिश्चित करेंगी।
- लैंगिक भेदभाव (Gender Discrimination) को खत्म करने के लिए परिवार के भीतर से शुरुआत करेंगी।
7. समाज और राष्ट्र निर्माण में बेटियों का महत्व
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही था कि “बेटियां समाज की शक्ति हैं।” जब एक बेटी पढ़ती है, तो वह केवल अपना भविष्य नहीं संवारती, बल्कि दो परिवारों और आने वाली पीढ़ियों को शिक्षित करती है। एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब हमारी बेटियां सुरक्षित, शिक्षित और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हों।
8. निष्कर्ष: बांका के लिए एक नई सुबह
चांदन प्रखंड के नावाडीह में आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम बांका जिले के प्रशासनिक सजगता का प्रतीक है। जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला के नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान यदि जमीनी स्तर पर इसी तरह लागू रहा, तो बांका जिला जल्द ही ‘बाल विवाह मुक्त’ और ‘महिला सशक्तिकरण’ के क्षेत्र में बिहार के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरेगा।
हम सभी का यह कर्तव्य है कि हम भी अपनी वेबसाइट bbrofficial.in के माध्यम से इस संदेश को घर-घर पहुंचाएं।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है? उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या को रोकना, बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनकी शिक्षा को बढ़ावा देना है।
प्रश्न 2: बाल विवाह की शिकायत कहाँ करें? उत्तर: बाल विवाह की सूचना आप नजदीकी पुलिस स्टेशन, 181 महिला हेल्पलाइन या चाइल्डलाइन नंबर 1098 पर दे सकते हैं।
प्रश्न 3: बांका में महिलाओं के लिए ‘वन स्टॉप सेंटर’ कहाँ है? उत्तर: बांका में जिला मुख्यालय स्तर पर वन स्टॉप सेंटर संचालित है, जहाँ पीड़ित महिलाएं किसी भी समय सहायता ले सकती हैं।
लेखक का नोट: यह लेख सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से bbrofficial.in पर प्रकाशित किया गया है। हम समाज के हर वर्ग से अपील करते हैं कि वे बेटियों के सम्मान और सशक्तिकरण में अपना योगदान दें।
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