
- मध्य विद्यालय पटवा श्रीपाथर को मिला प्रथम पुरस्कार
बांका : धोरैया प्रखंड के संकुल संसाधन केंद्र पटवा श्रीपाथर के सर्वलाल गुरु प्रसाद आदर्श उच्च विद्यालय पटवा में एक दिवसीय संकुल स्तरीय टीएलएम मेला का आयोजन किया गया। इस मेले में शिक्षकों द्वारा नवाचारपूर्ण शिक्षण सामग्री के माध्यम से बच्चों की सीखने की क्षमता को बेहतर बनाना रहा।
संकुल स्तरीय इस टीएलएम मेले में क्षेत्र के सभी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यालय प्रधानों की देखरेख में प्रत्येक विद्यालय द्वारा अपने-अपने स्तर पर टीएलएम तैयार किया गया। जिसे मेले में प्रदर्शित किया गया। शिक्षकों ने विभिन्न विषयों से संबंधित आकर्षक मॉडल, चार्ट, प्रोजेक्ट और शिक्षण सहायक सामग्री प्रस्तुत की। जिससे कक्षा में पढ़ाई को रोचक और प्रभावी बनाया जा सके। मेले का निरीक्षण पहुंचे पदाधिकारियों और संकुल सीआरसी ने किया। इसके बाद उन्होंने सभी विद्यालयों द्वारा प्रस्तुत टीएलएम का बारीकी से अवलोकन किया और शैक्षणिक गुणवत्ता, नवाचार, उपयोगिता एवं प्रस्तुति के आधार पर मूल्यांकन किया। कक्षा छह से आठ तक की श्रेणी में मध्य विद्यालय पटवा श्रीपाथर के उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए उसे प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं प्रोन्नत मध्य विद्यालय भल्लू को द्वितीय और मध्य विद्यालय जोठा को तृतीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इसी तरह कक्षा प्रथम से पांचवीं तक की श्रेणी में प्रोन्नत मध्य विद्यालय जोकी को प्रथम पुरस्कार मिला। मध्य विद्यालय पटवा श्रीपाथर को द्वितीय और प्राथमिक विद्यालय मड़पा को तृतीय पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया। सभी विजेता विद्यालयों को मेडल और ट्रॉफी दिया गया।
पुरस्कार वितरण कार्यक्रम उच्च विद्यालय पटवा के प्रभारी प्रधानाध्यापक मोहम्मद इरफान और मध्य विद्यालय पटवा श्रीपाथर के प्रधानाध्यापक विनय कुमार पांडे ने संयुक्त रूप से किया गया। उन्होंने शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि टीएलएम का सही उपयोग बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे आयोजनों से शिक्षकों में रचनात्मकता का विकास होता है, जिसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलता है।
इस अवसर पर शिक्षक रंजीत कुमार पासवान, मुकेश कुमार सिंह, मोहम्मद सरफराज, मिथिलेश कुमार, बच्ची झा आदि मौजूद थे।
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बांका जिले के धोरैया प्रखंड से जुड़ी इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक गतिविधि को एक विस्तृत, प्रभावशाली और मौलिक (Plagiarism-free) लेख के रूप में नीचे प्रस्तुत किया गया है। इसे एक व्यापक “एजुकेशन फीचर” का रूप दिया गया है।
शिक्षा में नवाचार की गूंज: धोरैया के पटवा में टीएलएम मेले ने बिखेरी ज्ञान की आभा
बांका (बिहार): आधुनिक शिक्षा पद्धति में किताबी ज्ञान से इतर व्यावहारिक ज्ञान की महत्ता तेजी से बढ़ रही है। इसी उद्देश्य को धरातल पर उतारते हुए बिहार के बांका जिला अंतर्गत धोरैया प्रखंड के संकुल संसाधन केंद्र पटवा श्रीपाथर में एक भव्य ‘एक दिवसीय संकुल स्तरीय टीएलएम (Teaching Learning Material) मेला’ का आयोजन किया गया। सर्वलाल गुरु प्रसाद आदर्श उच्च विद्यालय, पटवा के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि यदि शिक्षक अपनी रचनात्मकता का उपयोग करें, तो सरकारी स्कूलों के बच्चे भी निजी स्कूलों से कहीं आगे निकल सकते हैं।
शिक्षण सामग्री के माध्यम से ज्ञान का सरलीकरण
इस मेले का मुख्य उद्देश्य नवाचारपूर्ण शिक्षण सामग्री के माध्यम से बच्चों की सीखने की क्षमता को बेहतर बनाना और कठिन विषयों को खेल-खेल में समझाने की कला विकसित करना था। शिक्षकों ने बेकार पड़ी वस्तुओं (Waste Material) और कम लागत वाली सामग्रियों से ऐसे मॉडल्स और चार्ट्स तैयार किए, जो गणित, विज्ञान, भूगोल और भाषा जैसे विषयों को अत्यंत रोचक बना रहे थे।
उत्साहपूर्ण भागीदारी और रचनात्मकता का प्रदर्शन
संकुल स्तरीय इस मेले में क्षेत्र के सभी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अभूतपूर्व उत्साह का परिचय दिया। प्रत्येक विद्यालय के प्रधानाध्यापक की देखरेख में शिक्षकों ने हफ्तों की मेहनत के बाद अपने-अपने टीएलएम तैयार किए थे।
- प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण: मेले में प्रदर्शित आकर्षक मॉडल्स, रंगीन चार्ट्स, विज्ञान के लाइव प्रोजेक्ट्स और भाषाई पहेलियों ने सबका मन मोह लिया।
- उद्देश्य: इन सामग्रियों का एकमात्र लक्ष्य कक्षा के वातावरण को रोचक बनाना और बच्चों के भीतर से पढ़ाई का बोझ कम कर उन्हें प्रभावी ढंग से शिक्षित करना है।
सटीक मूल्यांकन और विजेताओं का चयन
मेले के दौरान संकुल समन्वयक (CRC) और शिक्षा विभाग के अन्य पदाधिकारियों ने प्रत्येक स्टाल का दौरा किया। उन्होंने शिक्षकों से उनके द्वारा बनाए गए मॉडल्स की कार्यप्रणाली को समझा और शैक्षणिक गुणवत्ता, नवाचार (Innovation), उपयोगिता एवं प्रस्तुति के कड़े मापदंडों पर उनका मूल्यांकन किया।
पुरस्कारों की तालिका: प्रतिभा का सम्मान
प्रतियोगिता को दो श्रेणियों में बांटा गया था, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को सम्मानित किया गया:
कक्षा 6 से 8 (उच्च प्राथमिक वर्ग):
| स्थान | विद्यालय का नाम | सम्मान |
| :— | :— | :— |
| प्रथम | मध्य विद्यालय, पटवा श्रीपाथर | स्वर्ण मेडल एवं ट्रॉफी |
| द्वितीय | प्रोन्नत मध्य विद्यालय, भल्लू | रजत मेडल एवं ट्रॉफी |
| तृतीय | मध्य विद्यालय, जोठा | कांस्य मेडल एवं ट्रॉफी |
कक्षा 1 से 5 (प्राथमिक वर्ग):
| स्थान | विद्यालय का नाम | सम्मान |
| :— | :— | :— |
| प्रथम | प्रोन्नत मध्य विद्यालय, जोकी | स्वर्ण मेडल एवं ट्रॉफी |
| द्वितीय | मध्य विद्यालय, पटवा श्रीपाथर | रजत मेडल एवं ट्रॉफी |
| तृतीय | प्राथमिक विद्यालय, मड़पा | कांस्य मेडल एवं ट्रॉफी |
शिक्षाविदों के विचार: बच्चों के भविष्य की नींव
पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन संयुक्त रूप से उच्च विद्यालय पटवा के प्रभारी प्रधानाध्यापक मोहम्मद इरफान और मध्य विद्यालय पटवा श्रीपाथर के प्रधानाध्यापक विनय कुमार पांडे द्वारा किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा:
“टीएलएम केवल सजावट की वस्तु नहीं है, बल्कि यह एक शिक्षक का वह हथियार है जो नीरस कक्षा को जीवंत बना देता है। जब बच्चा किसी वस्तु को अपनी आंखों से देखता और स्पर्श करता है, तो वह ज्ञान उसके मस्तिष्क में स्थायी रूप से अंकित हो जाता है। ऐसे आयोजनों से शिक्षकों के भीतर छिपी रचनात्मकता बाहर आती है, जिसका सीधा लाभ हमारे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को मिलता है।”
इनकी रही सक्रिय उपस्थिति
इस शैक्षणिक उत्सव को सफल बनाने में शिक्षक रंजीत कुमार पासवान, मुकेश कुमार सिंह, मोहम्मद सरफराज, मिथिलेश कुमार, और बच्ची झा सहित संकुल के दर्जनों शिक्षकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में विजेता शिक्षकों और विद्यालयों के बीच मेडल और ट्रॉफी का वितरण कर उन्हें भविष्य में और बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
निष्कर्ष: भविष्य की राह
धोरैया प्रखंड में आयोजित यह टीएलएम मेला केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि शिक्षण व्यवस्था में बदलाव की एक लहर है। यह दर्शाता है कि बांका के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर शिक्षक और प्रशासन सजग हैं। यदि ऐसे नवाचार लगातार होते रहे, तो सरकारी विद्यालयों के प्रति अभिभावकों का विश्वास और भी सुदृढ़ होगा।
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बांका जिले के धोरैया प्रखंड में आयोजित इस टीएलएम (Teaching Learning Material) मेले पर आधारित एक अत्यंत विस्तृत, विश्लेषणात्मक और शोधपरक लेख नीचे दिया गया है। इसे शैक्षणिक दृष्टिकोण से और अधिक गहराई दी गई है ताकि यह एक व्यापक रिपोर्ट बन सके।
धोरैया के पटवा में उमड़ा नवाचार का सैलाब: टीएलएम मेले ने बदली सरकारी स्कूलों की तस्वीर
विशेष आलेख: बांका डेस्क
बिहार के बांका जिले के अंतर्गत धोरैया प्रखंड इन दिनों अपनी शैक्षणिक गतिविधियों के कारण चर्चा के केंद्र में है। हाल ही में संकुल संसाधन केंद्र (CRC) पटवा श्रीपाथर के अंतर्गत आने वाले सर्वलाल गुरु प्रसाद आदर्श उच्च विद्यालय में आयोजित एक दिवसीय ‘संकुल स्तरीय टीएलएम मेला’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक शिक्षा केवल डिजिटल बोर्ड या महंगी प्रयोगशालाओं की मोहताज नहीं है, बल्कि यह एक शिक्षक की रचनात्मकता और समर्पण का प्रतिबिंब है।
1. टीएलएम मेले की परिकल्पना और आयोजन का मुख्य उद्देश्य
अक्सर यह माना जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में संसाधनों का अभाव होता है, लेकिन इस मेले ने इस धारणा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। टीएलएम (शिक्षण सहायक सामग्री) मेले के पीछे मुख्य उद्देश्य ‘लर्निंग विद फन’ (खेल-खेल में शिक्षा) के सिद्धांत को धरातल पर उतारना था।
- जटिल विषयों का सरलीकरण: गणित के कठिन सूत्र, विज्ञान के जटिल सिद्धांत और भूगोल की सीमाओं को चार्ट और मॉडल्स के माध्यम से इतना सरल बना दिया गया कि एक प्राथमिक कक्षा का बच्चा भी उन्हें आसानी से समझ सके।
- शिक्षकों की रचनात्मकता को मंच: यह मेला शिक्षकों के लिए एक ऐसा मंच था जहाँ वे अपनी कलात्मकता और शिक्षण कौशल का प्रदर्शन कर सके।
- न्यूनतम लागत, अधिकतम लाभ: अधिकांश सामग्री ‘कबाड़ से जुगाड़’ (Zero Investment) पद्धति पर आधारित थी, जिससे यह संदेश गया कि बेहतर शिक्षा के लिए भारी बजट से अधिक मजबूत इरादों की आवश्यकता है।
2. प्रदर्शनी का विस्तृत अवलोकन: जब मॉडल बोले और चार्ट मुस्कुराए
मेले में भाग लेने वाले प्रत्येक विद्यालय के स्टाल पर शिक्षकों और बच्चों की मेहनत साफ झलक रही थी। प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के शिक्षकों ने अपनी-अपनी विधाओं में निम्नलिखित नवाचार प्रस्तुत किए:
- विज्ञान और पर्यावरण: सौर मंडल के चलते हुए मॉडल, जल चक्र की प्रक्रिया को समझाते चार्ट और मानव शरीर के अंगों के कार्य को दर्शाने वाले प्रोजेक्ट्स आकर्षण का केंद्र रहे।
- गणित की जादूगरी: स्थानीय शिक्षकों ने लकड़ी के टुकड़ों, गत्तों और धागों की मदद से ज्यामिति (Geometry) और अंकगणित को समझाने वाले नायाब तरीके पेश किए।
- भाषा और साहित्य: हिंदी और अंग्रेजी व्याकरण को रोचक बनाने के लिए ‘शब्द वृक्ष’ और ‘व्याकरण की ट्रेन’ जैसे टीएलएम का प्रदर्शन किया गया।
3. मूल्यांकन की प्रक्रिया और उत्कृष्टता का सम्मान
किसी भी आयोजन की सफलता उसकी निष्पक्षता पर निर्भर करती है। संकुल समन्वयक (CRC) और अन्य पर्यवेक्षकों ने बारीकी से हर एक स्टाल का निरीक्षण किया। उन्होंने केवल सुंदरता नहीं, बल्कि सामग्री की उपयोगिता (Utility) और शैक्षणिक मूल्य (Academic Value) को आधार बनाया।
विजेताओं की उपलब्धियां: एक नजर में
मध्य विद्यालय पटवा श्रीपाथर ने कक्षा 6 से 8 की श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त कर यह साबित किया कि उनका शैक्षणिक नेतृत्व और नवाचार जिला स्तर पर मिसाल बन सकता है। वहीं, प्रोन्नत मध्य विद्यालय जोकी ने कक्षा 1 से 5 की श्रेणी में प्रथम आकर बुनियादी शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।
सम्मानित विद्यालयों की पूरी सूची:
- कक्षा 6-8 श्रेणी: प्रथम (पटवा श्रीपाथर), द्वितीय (भल्लू), तृतीय (जोठा)।
- कक्षा 1-5 श्रेणी: प्रथम (जोकी), द्वितीय (पटवा श्रीपाथर), तृतीय (मड़पा)।
4. नेतृत्व की भूमिका: मार्गदर्शकों के विचार
पुरस्कार वितरण के दौरान मोहम्मद इरफान (प्रभारी प्रधानाध्यापक, उच्च विद्यालय पटवा) और विनय कुमार पांडे (प्रधानाध्यापक, मध्य विद्यालय पटवा श्रीपाथर) ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए एक बहुत ही प्रेरक बात कही। उन्होंने कहा कि:
“एक शिक्षक वही है जो कठिन से कठिन पाठ को बच्चे के मानसिक स्तर पर ले जाकर सरल बना दे। टीएलएम वह पुल है जो शिक्षक के ज्ञान और बच्चे की समझ के बीच की दूरी को खत्म करता है।”
उन्होंने विशेष रूप से उन शिक्षकों की सराहना की जिन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री तैयार की।
5. आयोजन की सफलता के पीछे के स्तंभ
इस पूरे मेले के सफल क्रियान्वयन में रंजीत कुमार पासवान, मुकेश कुमार सिंह, मोहम्मद सरफराज, मिथिलेश कुमार, और बच्ची झा जैसे समर्पित शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी रही। इन शिक्षकों ने न केवल अपनी सामग्री प्रदर्शित की, बल्कि पूरे आयोजन के प्रबंधन में भी सहयोग किया।
6. निष्कर्ष और भविष्य की राह
धोरैया के पटवा में आयोजित यह टीएलएम मेला बांका जिले की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकता है। यह मेला संदेश देता है कि यदि समुदाय, शिक्षक और प्रशासन मिलकर प्रयास करें, तो सरकारी विद्यालयों का कायाकल्प निश्चित है।
आगे की राह:
- इन टीएलएम का उपयोग नियमित कक्षाओं में होना चाहिए।
- ऐसे मेलों का आयोजन प्रखंड और जिला स्तर पर नियमित अंतराल पर होना चाहिए।
- उत्कृष्ट मॉडल्स का दस्तावेजीकरण कर अन्य संकुलों के साथ साझा किया जाना चाहिए।
यह विस्तृत रिपोर्ट न केवल एक घटना का विवरण है, बल्कि यह बांका के ग्रामीण अंचल में हो रहे मौन शैक्षणिक क्रांति का दस्तावेज है।