
बांका :बांका जिले में जेल प्रशासन और यूको ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (यूकोआरसेटी) के संयुक्त प्रयासों से आयोजित कृषि उद्यमी प्रशिक्षण कार्यशाला का शुक्रवार को मंडल कारा बांका में भव्य समापन हुआ। इस कार्यशाला का शुभारंभ इस वर्ष 2 जनवरी को किया गया था और यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों के लिए एक सुनहरा अवसर साबित हुआ। प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्देश्य न केवल बंदियों को कृषि क्षेत्र के आधुनिक तकनीकी ज्ञान से परिचित कराना था, बल्कि उन्हें इस क्षेत्र में व्यावसायिक रूप से सफल होने के लिए आवश्यक कौशल और मार्गदर्शन प्रदान करना भी था।
समापन समारोह में जेल अधीक्षक आशीष रंजन ने अपने संबोधन में कहा कि यह प्रशिक्षण बंदियों के लिए जीवन में एक नई दिशा तय करने का अवसर है। उन्होंने बताया कि यूकोआरसेटी जैसी योग्य और अनुभवी संस्था बंदियों को कृषि उद्यमिता के क्षेत्र में प्रशिक्षित कर रही है, जिससे उनकी रिहाई के बाद समाज में पुनः सम्मिलन आसान और फलदायी बन सके। जेल अधीक्षक ने विशेष रूप से कहा, “हमारा पूर्ण विश्वास है कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से बंदी जब कभी जेल से बाहर जाएंगे तो न केवल एक सफल कृषि उद्यमी बनेंगे, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी बेहतर दिशा देने में सक्षम होंगे।”
प्रशिक्षण की रूपरेखा और उद्देश्य
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में कुल 28 बंदियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार बनाई गई थी कि बंदियों को केवल कृषि के तकनीकी ज्ञान तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें कृषि उद्यमिता के व्यावहारिक और आर्थिक पक्षों की जानकारी भी दी जाए। यूकोआरसेटी के प्रशिक्षकों ने आधुनिक कृषि पद्धतियों, फसल उत्पादन, मिट्टी की गुणवत्ता, सिंचाई तकनीक, कीट प्रबंधन और जैविक खेती जैसी विधियों पर विशेष ध्यान दिया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कैसे कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है और कृषि को आय का स्थायी स्रोत बनाया जा सकता है।
यूकोआरसेटी के प्रशिक्षक वर्ग ने प्रशिक्षण के दौरान यह भी समझाया कि कृषि केवल खेतों तक सीमित नहीं है। कृषि आधारित छोटे उद्योग, हर्बल प्रोडक्ट्स, पोल्ट्री फार्मिंग, डेयरी प्रबंधन, और स्थानीय बाजार में खुदरा बिक्री जैसे क्षेत्रों में भी कृषि उद्यमिता से अच्छा लाभ कमाया जा सकता है। प्रशिक्षकों ने बंदियों को सरल भाषा और उदाहरणों के माध्यम से बताया कि कैसे छोटे निवेश से भी कृषि क्षेत्र में सफलता पाई जा सकती है।
आरसेटी निदेशक राकेश कुमार सिंह ने समापन समारोह में यह कहा कि यह कार्यक्रम भविष्य में अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। उनका मानना है कि जब बंदी समाज में लौटेंगे, तो उन्हें रोजी-रोटी की चिंता नहीं करनी पड़ेगी, क्योंकि उन्हें व्यावहारिक और उपयोगी कौशल प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पहल समाज और जेल प्रशासन के लिए एक मॉडल बन सकती है, जिससे बंदियों को अपराध के बजाय व्यावसायिक और सकारात्मक मार्ग पर लाया जा सके।
प्रशिक्षण का महत्व और प्रभाव
बंदी प्रशिक्षण का हिस्सा बनने के बाद केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि उनमें आत्मनिर्भर बनने की भावना और समाज में पुनः सम्मिलन का आत्मविश्वास भी विकसित हो रहा है। जेल अधीक्षक आशीष रंजन ने इस अवसर पर कहा कि आज के समय में कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। वैज्ञानिक पद्धति और नई तकनीक के माध्यम से यह क्षेत्र न केवल आर्थिक दृष्टि से मजबूत बन रहा है, बल्कि यह रोजगार सृजन का भी एक बड़ा स्रोत है।
उन्होंने यह भी बताया कि जेल प्रशासन इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने का प्रयास कर रहा है, ताकि बंदियों को व्यावसायिक ज्ञान के साथ-साथ जीवन कौशल भी मिल सके। यह पहल विशेष रूप से उन बंदियों के लिए फायदेमंद है जो आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं। ऐसे बंदियों के लिए यह प्रशिक्षण भविष्य में उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
प्रशिक्षण के दौरान विशेष गतिविधियां
प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान बंदियों ने विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। इसमें खेती के लिए मिट्टी की जांच, बीज रोपण, सिंचाई के आधुनिक तरीकों की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, कीट और रोग प्रबंधन, फसल के बाद के प्रबंधन और विपणन रणनीतियों पर विशेष ध्यान दिया गया। यूकोआरसेटी के प्रशिक्षकों ने इन गतिविधियों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया कि बंदियों को केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में इसे लागू करने का अनुभव भी प्राप्त हो।
प्रशिक्षकों ने यह भी समझाया कि कृषि उद्यमिता केवल लाभ कमाने तक सीमित नहीं है। यह पर्यावरण संरक्षण, समाज में स्वस्थ जीवन और समुदाय के विकास का भी मार्ग है। इसके लिए उन्होंने जैविक खेती, जल संरक्षण, और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग की महत्वता पर विशेष जोर दिया।
समापन समारोह और पुरस्कार वितरण
समापन समारोह में जेल अधीक्षक आशीष रंजन के साथ अन्य अधिकारियों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर सहायक अधीक्षक रामनंदन पंडित, उपाधीक्षक सुशील कुमार गुप्ता, कक्षपाल योगेंद्र कुमार शर्मा, और अन्य अधिकारी उपस्थित थे। जेल प्रशासन की ओर से प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए, जिससे उन्हें उनके प्रशिक्षण की मान्यता मिली।
इस अवसर पर आरसेटी निदेशक राकेश कुमार सिंह ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यशाला केवल एक प्रारंभिक कदम है। भविष्य में जेल प्रशासन और यूकोआरसेटी मिलकर बंदियों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे, ताकि उन्हें समाज में आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिले।
भविष्य की योजनाएं और पहल
जेल प्रशासन और यूकोआरसेटी का यह संयुक्त प्रयास बंदियों को नए कौशल और व्यवसायिक ज्ञान से लैस करने का उदाहरण है। आने वाले समय में इस पहल को और व्यापक बनाने की योजना है। विभिन्न तकनीकी और व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों को समाज में पुनः सम्मिलन के लिए तैयार किया जाएगा।
यह पहल सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब बंदी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाकर समाज में लौटेंगे, तो यह न केवल उनके परिवार के लिए लाभकारी होगा, बल्कि समाज में अपराध की दर को कम करने में भी मदद करेगा। इसके साथ ही यह पहल जेल प्रशासन की ओर से मानवाधिकार और बंदियों के पुनर्वास के क्षेत्र में एक सराहनीय कदम है।
निष्कर्ष
बांका जेल में आयोजित यह कृषि उद्यमी प्रशिक्षण कार्यशाला यह स्पष्ट करती है कि शिक्षा और प्रशिक्षण केवल किताबों या विद्यालय तक सीमित नहीं है। यदि इसे सही दिशा और मार्गदर्शन के साथ प्रदान किया जाए, तो यह बंदियों जैसे समाज के विशेष वर्गों के लिए भी जीवन बदलने वाला अनुभव बन सकता है।
यूकोआरसेटी और जेल प्रशासन की यह संयुक्त पहल बंदियों को न केवल आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी प्रदान करेगी। प्रशिक्षकों द्वारा दिए गए ज्ञान और कौशल का प्रभाव लंबे समय तक दिखाई देगा और यह कार्यक्रम भविष्य में अन्य जेलों और प्रशिक्षण संस्थानों के लिए एक आदर्श उदाहरण बनेगा।
अंततः यह कार्यक्रम यह संदेश देता है कि अपराध के पथ पर चलने वाले व्यक्ति भी सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण से समाज के लिए लाभकारी सदस्य बन सकते हैं। कृषि उद्यमिता के माध्यम से यह न केवल आर्थिक विकास का स्रोत बनेगा, बल्कि बंदियों को जीवन में नई दिशा और आत्म-सम्मान भी प्रदान करेगा।